मौत

आंसू रूठ गए हैं,अब वे उनकी आंखों में नहीं रहते ,
अब वे ख़ामोश रहते हैं , लफ्ज़ अब उनकी जुबां में नहीं रहते।

वो सब कुछ भूल बैठें है,अब हमें याद भी नहीं करते,
अब वो पत्थर दिल हो गए हैं, इश्क़ की बातें नहीं करते ।

वो मुस्कुराते तक नहीं हैं , चेहरे पर हंसी के फरिश्ते नहीं रहते,
पलकें आंखों का पहरा नहीं देती, आंखो में अब ख़्वाब नहीं रहते ।

भूख जिस्म से गायब है , अब खाने में कोई फ़रमाइश नहीं करते,
दिल धड़कना भूल गया है , सांस लेने के लिए मछली सा नहीं तड़पते ।

रूह अपनी मंजिल पर आ पहुंची है, प्राण जिस्म में नहीं रहते,
कल उनकी शादी है,  मगर दूल्हे सफेद लिबास में नहीं रहते।

चार लोग उनको कंधे पर लायेंगे, जनाजे घोड़ी पर नहीं चलते ,
बाराती भी साथ होंगे, मगर नाचने के लिए आगे नहीं चलते।

जब दुल्हन मौत बनी हो , तो दूल्हे को घर नहीं रखते ,
ये शादी सच है दुनिया का, डोली बिछड़ने पर रोया नहीं करते।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

हुस्न बैठा है

“मेरा शायराना सफर”
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हुस्न बैठा है राह में तारीफों का भिखारी बनकर ,
सादगी रहती है सवरने वालों की दुश्वारी बनकर ।
अमीरी दबी रहती है सोने – चांदी के बोझ नीचे,
ग़रीबी चलती है शोक से नीम का तिनका पहनकर ।।
***आशीष रसीला***

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

वो निकलते हैं जब शहर

वो निकलते हैं जब शहर, तो शहर ठहर कर देखता है,
जवानों की तो छोड़िये, बुज़ुर्ग भी दिल थाम कर बैठता है ।

हवाऐं भी ना जाने क्यूं उसे छूने को आती हैं ?
ये बादल भी उसे छूने के खातिर बरस कर देखता है ।

सितारे बाम – ऐ – फलक से  उतर जाते हैं ,
चांद भी उसको खिड़की से छुप कर देखता है ।

उनका हुस्न उनकी जवानी का पहरा देता है ,
के ख़ुदा भी उसकी खूबसूरती को पलट कर देखता है

हीरे – मोती उन पर सजने की फ़रियाद करते हैं ,
के आईना भी खुद उन्हें सवर कर देखता है।।

यूं तो हम भी देखते है रोक हसीनाओं को लेकिन,
हमारा दिल भी ना जाने क्यूं उन्हीं पर ठहर कर देखता है। ।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

माँ

मैं मर ही जाता तेरी बद्दुआओं के चलते ,
मुझे मेरी माँ की दुवाओं ने संभाल रखा है ।

मैं फकत टूट कर गिरने ही वाला था ,
मेरा हाथ मेरे अब्बा ने थाम रखा है ।

मुझे तेरी इस दुनियां में रहने का कोई शोक नहीं ,मगर
मेरे वजूद के लिए माँ ने अपनी सांसों को गिरवी रखा है।।

*** आशीष रसीला ***

Ashish Rasila

वो और मैं

वो हवा सी बहती है , मैं चिराग़ सा जलता हूं,
वो सुबह सी खिलती है , मैं शाम सा ढलता हूं।

वो चांद की सहेली है , मैं जुगनू सा फिरता हूं ,
वो बारिश की बूंदों सी ,  मैं रेत सा उड़ता हूं ।

वो एक पहेली उलझी सी , मैं उसमें उलझा रहता हूं ,
वो परियों की सरजमीं से, मैं बाशिंदा जमीं का लगता हूं।

वो वक़्त सी चलती है , मैं एक लम्हा सा ठहरता हूं,
वो ख़्वाब में मिलती है , मैं हक़ीक़त में रहता हूं ।

वो किताब है ग़ज़लों की , मैं आख़िरी हर्फ पर लिखा हूं ,
वो अप्सराओं की कहानी है, मैं वो कहानी लिखता हूं।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

जिदंगी तेरे बारे में सोच कर तरस अता है

ज़िन्दगी तेरे बारे में सोच कर मुझे तरस आता है ,
तेरी मंजिलों का रास्ता सिर्फ मौत तक जाता है ।

वक्त की जुंबिश में हम दोनों हैं मुसाफ़िर ,
यहां सिर्फ लम्हा लिखने पर ही लम्हा बित जाता है ।

तू मेरा ख़्वाब है , तू अपनी मंज़िल से पहले मुझे जीने दे ,
मौत के आने पर जिदंगी का हर ख़्वाब टूट जाता है ।

उम्र – ऐ – दराज़ जहान्नुम में गुजर जाएगी ,
तुम हमसफ़र बनों तो , हर रास्ता जन्नत को जाता है ।

ऐ – जिंदगी , मुझे तुमसे कोई शिकवा नहीं है, लेकिन  ,
तू खुश रहा कर, खुश रहने में तेरा क्या जाता है ?

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

एक अनोखा त्योहार है तारिक़ – ए – निकाह रख देना

अभी वो बच्ची है ख़्वाब में शहजादे नहीं आते ,
सोने से पहले उसके सिरहाने पर कुछ खिलौने रख देना ।

वो सो जाए तो उसकी पलकों पर जुगनू रख देना ,
चांद को चुपके से छिपाकर उसकी हथेली पर रख देना।

जिंदगी कांटों भरी होगी, ये बात अभी मत बताना ,
फिलहाल हर कदम पर उसके रास्ते में  फूल रख देना।

वो रोएगी बहुत दस्तूर – ए – निकाह सुनकर ,
तुम गले लगाकर मुहफिज, दस्तूर – ए – शाहनाई रख देना।

बहुत मुश्किल अपनी सरजमीं छोड़ पराया हो जाना ,
एक अनोखा त्योहार है तारीख़ – ए – निकाह रख देना ।।
*** आशीष रसीला***

Ashish Rasila

दिल की बातें ना बताया कर

गम को ले कर सीने में किसी के पास ना जाया कर,
किसी के पूछे बिना ही यूं, दिल की बातें ना बताया कर।

जब दिल जले मोमबत्ती सा और आंखें मोम सी बहती हो,
हाथों में ले कर आईने को, मंद – मंद मुस्कुराया कर ।

भिखर ना जाओ फिर किसी हवा से टकरा कर,
अब से खुद को तूफानों में सजाया कर ।

ख़ुदा से मिलने का अगर कभी दिल करे,
किसी हंसते बच्चे से मिल आया कर।

आज जो कुछ भी है, सब कुछ ख़ुदा फ़ज़ल  है,
हर बात पर खुद को यूं  गुनेहगार ना बनाया कर ।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila