नकारात्मक – सकारात्मक

हां माना के मैं नकारात्मक(Negative) हूं,
मगर तेरे सकारात्मक (Positive) होने का एहसास भी तो मैं ही हूं।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

मैंने सोचा कि हमसफ़र

मैंने सोचा कि हमसफ़र हमेशा साथ निभाते है,
हैरत में पड़ गया,
जब देखा, की रोशनी को देख तो
खुद के साए भी पीछे छिप जाते है।।

***आशीष रसीला***

नामुमकिन

एक ज़िन्दगी में खुद को समझ पाना नामुमकिन है,
जब खुद में उलझे रहते हो, किसी ओर को समझ पाना नामुमकिन है।


ये दौलत, ये शोहरत तुम जिदंगी भर कमा सकते हो,
मगर कुछ भी साथ ले जाना तो नामुमकिन है ।

तुम खरीदों तो शायद पूरा शहर खरीद लो,
मगर ज़िन्दगी खरीद पाना नामुमकिन है।

हजारों शिकायतें रहती है हमको दूसरों से,
मगर खुद को सही कहना भी नामुमकिन है।

***आशीष रसीला***

दिल सब ने

दिल सब ने किसी ना किसी का दुखाया हैं, इंसान कोई फरिश्ता नहीं,
धोखा हम सब ने वफ़ा में खाया हैं, यूं कोई जिंदगी ख़त्म करता नहीं।
अजीब हैं, वे लोग जिनको सच्ची मुहब्बत नहीं दिखती,
प्यार माँ सा, दोस्त पिता से बेहतर दुनिया में कोई होता नहीं।।
**आशीष रसीला**

वतन

ये वतन से दिल ही कुछ खास लगा बैठें है,
कुछ मुहब्बत में वतन पर जान लुटा बैठें है।
यहां का ज़रा -,ज़रा तैयार रहता है वतन पर मिटने को,
ये मौत से नहीं डरते, ये जान हथेली पर रख कर बैठें है।।

***आशीष रसीला***

कुछ ज्यादा फ़र्क नहीं है

अय आसमां कुछ ज्यादा फ़र्क नहीं है तुझ में और मुझ में।
फ़र्क सिर्फ़ इतना है,
की तू मुझे सर झुका  कर देखता है,
और मैं तुझे सर उठा कर देखता हूं ।।

***आशीष रसीला***

कुछ खास नहीं बताने को

कुछ खास नहीं है बताने को , कुछ खास नहीं है जताने को|| कुछ शब्दों का जंजाल है अंदर, जो शायद काफी है ये जिन्दगी बिताने को||

***आशीष रसीला***

लिख दूं

तुम आज कुछ भी कहो, मैं वो लिख  दूं,
ख़ुशी को बेवफ़ा, गम को वफ़ा लिख दूं।
आज मेरी  ये कलम तेरे लफ्ज़ों पर चलेगी,
तुम कहो तो आज मैं किस्मत की भी तकदीर लिख दूं।।