माँ

मैं मर ही जाता तेरी बद्दुआओं के चलते ,
मुझे मेरी माँ की दुवाओं ने संभाल रखा है ।

मैं फकत टूट कर गिरने ही वाला था ,
मेरा हाथ मेरे अब्बा ने थाम रखा है ।

मुझे तेरी इस दुनियां में रहने का कोई शोक नहीं ,मगर
मेरे वजूद के लिए माँ ने अपनी सांसों को गिरवी रखा है।।

*** आशीष रसीला ***

Ashish Rasila

वो और मैं

वो हवा सी बहती है , मैं चिराग़ सा जलता हूं,
वो सुबह सी खिलती है , मैं शाम सा ढलता हूं।

वो चांद की सहेली है , मैं जुगनू सा फिरता हूं ,
वो बारिश की बूंदों सी ,  मैं रेत सा उड़ता हूं ।

वो एक पहेली उलझी सी , मैं उसमें उलझा रहता हूं ,
वो परियों की सरजमीं से, मैं बाशिंदा जमीं का लगता हूं।

वो वक़्त सी चलती है , मैं एक लम्हा सा ठहरता हूं,
वो ख़्वाब में मिलती है , मैं हक़ीक़त में रहता हूं ।

वो किताब है ग़ज़लों की , मैं आख़िरी हर्फ पर लिखा हूं ,
वो अप्सराओं की कहानी है, मैं वो कहानी लिखता हूं।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

जिदंगी तेरे बारे में सोच कर तरस अता है

ज़िन्दगी तेरे बारे में सोच कर मुझे तरस आता है ,
तेरी मंजिलों का रास्ता सिर्फ मौत तक जाता है ।

वक्त की जुंबिश में हम दोनों हैं मुसाफ़िर ,
यहां सिर्फ लम्हा लिखने पर ही लम्हा बित जाता है ।

तू मेरा ख़्वाब है , तू अपनी मंज़िल से पहले मुझे जीने दे ,
मौत के आने पर जिदंगी का हर ख़्वाब टूट जाता है ।

उम्र – ऐ – दराज़ जहान्नुम में गुजर जाएगी ,
तुम हमसफ़र बनों तो , हर रास्ता जन्नत को जाता है ।

ऐ – जिंदगी , मुझे तुमसे कोई शिकवा नहीं है, लेकिन  ,
तू खुश रहा कर, खुश रहने में तेरा क्या जाता है ?

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

एक अनोखा त्योहार है तारिक़ – ए – निकाह रख देना

अभी वो बच्ची है ख़्वाब में शहजादे नहीं आते ,
सोने से पहले उसके सिरहाने पर कुछ खिलौने रख देना ।

वो सो जाए तो उसकी पलकों पर जुगनू रख देना ,
चांद को चुपके से छिपाकर उसकी हथेली पर रख देना।

जिंदगी कांटों भरी होगी, ये बात अभी मत बताना ,
फिलहाल हर कदम पर उसके रास्ते में  फूल रख देना।

वो रोएगी बहुत दस्तूर – ए – निकाह सुनकर ,
तुम गले लगाकर मुहफिज, दस्तूर – ए – शाहनाई रख देना।

बहुत मुश्किल अपनी सरजमीं छोड़ पराया हो जाना ,
एक अनोखा त्योहार है तारीख़ – ए – निकाह रख देना ।।
*** आशीष रसीला***

Ashish Rasila

दिल की बातें ना बताया कर

गम को ले कर सीने में किसी के पास ना जाया कर,
किसी के पूछे बिना ही यूं, दिल की बातें ना बताया कर।

जब दिल जले मोमबत्ती सा और आंखें मोम सी बहती हो,
हाथों में ले कर आईने को, मंद – मंद मुस्कुराया कर ।

भिखर ना जाओ फिर किसी हवा से टकरा कर,
अब से खुद को तूफानों में सजाया कर ।

ख़ुदा से मिलने का अगर कभी दिल करे,
किसी हंसते बच्चे से मिल आया कर।

आज जो कुछ भी है, सब कुछ ख़ुदा फ़ज़ल  है,
हर बात पर खुद को यूं  गुनेहगार ना बनाया कर ।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

ना जाने वो कैसी दिखती होगी ?

उफ़ुक़ के उस पार  वो जरूर कहीं रहती होगी,
ख़ुदा जाने या वो जाने, ना जाने कैसी दिखती होगी ?

मैं अक्सर  सोचता रहता हूं फकत उसके बारे में,
वो सूरज की किरण या रात सांवली सी दिखती होगी ।

मुझे मालूम है उसके भी होंगे बहुत  चाहने वाले,
मुनासिफ है उसकी नजर भी किसी पर टिकती होगी।

ये बेख्याल सा ख्याल सिर्फ मुझको ही आता है क्या ?
या वो भी मुझसे मिलने के लिए अक्सर सोचती होगी ?

मैं तेरी तलाश में जरूर निकलूंगा एक दिन,
यकीनन तुझसे मिलकर जिंदगी, जिदंगी सी लगती होगी।।
***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

मैं सिर्फ एक फ़साना था,तेरे अफसानों में

मैं सिर्फ एक  फ़साना था, तेरे अफसानों में,
मैं सिर्फ के बहाना था, तेरे कई बहानों में।

मैं  तेरा एक जाम था, खुदको महखाना समझ बैठा,
मैं भी बस एक चाहने वाला था, तेरे कई चाहने वालों में।

मैं जिदंगी का हिस्सा था, खुदको जिंदगी समझता रहा,
एक उम्र बीती है मेरी, खुद को ये बात समझाने में।

अब जब-तक जिऊंगा, खुद के साथ रहूंगा मैं,
एक  अरसा लगा है मुझे, खुद के पास आने में ।।
***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

मेरी तहरीर मिट नहीं सकती

मेरी तहरीर मिट नहीं सकती फकत उनके कहने से,
गोया समंदर का गुमार नहीं  जाता, नदियों के जाने से।

वो बेशक मेरे इत्लाफ़ में जशन करें बहुत,
अबस है सारे इल्ज़ाम, खुदी मिटती नहीं यूं मिटाने से।

मैं फ़िगार में  हूं, मुझे  पशेमान मत समझ,
कुछ अश्क महमान थे मेरे, ग्रद के आंखों में जाने से।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila