किताबें

किताबें……!
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ये ऐसी ख़ुशबू ,जो कहीं ओर से ना आए ,
ये वो ख़ुशबू ,जो सिर्फ किताबों से आए।

कुछ ऐसी बातें, जो किसी और को ना बताए,
जो उसके करीब हो, वो सिर्फ उसको बताए ।

तुम हाथ मिलाओ, तो वो बाहें फैलाए,
अगर किताबें हो दोस्त, कोई दिल तोड़ कर दिखाए ?

ये ऐसी मुहब्बत, जी भरने को ना आए ,
उसकी ऐसी दोस्ती, दुनिया देखती रह जाए।

उसके ऐसे मशवरे, कभी हंसाए तो कभी रुलाए ,
दुनियां के हर दर्द का, जब वो इलाज बताए ।

जब बिखरे पन्ने, तब वो  जुल्फ़ें सजाए ,
अगर कोई सादा दिल देखे , तो प्यार हो जाए।

खुदा करे, ये  गुनाह  कभी मुझ से ना हो जाए ,
जान निकल जाती है, वो हाथ से जब झूट जाए।।
***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

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