जिदंगी तेरे बारे में सोच कर तरस अता है

ज़िन्दगी तेरे बारे में सोच कर मुझे तरस आता है ,
तेरी मंजिलों का रास्ता सिर्फ मौत तक जाता है ।

वक्त की जुंबिश में हम दोनों हैं मुसाफ़िर ,
यहां सिर्फ लम्हा लिखने पर ही लम्हा बित जाता है ।

तू मेरा ख़्वाब है , तू अपनी मंज़िल से पहले मुझे जीने दे ,
मौत के आने पर जिदंगी का हर ख़्वाब टूट जाता है ।

उम्र – ऐ – दराज़ जहान्नुम में गुजर जाएगी ,
तुम हमसफ़र बनों तो , हर रास्ता जन्नत को जाता है ।

ऐ – जिंदगी , मुझे तुमसे कोई शिकवा नहीं है, लेकिन  ,
तू खुश रहा कर, खुश रहने में तेरा क्या जाता है ?

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

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