उसे कह दो

उसे जरूरत नही है यूँ कीमती लिबास पहनने की ,
उसके बदन की तराश ही कयामत लाने का हुनर रखती है |
उसे जरूरत  नही है यूँ चहरे पर चन्दन का लेप लगाने की ,
उसकी खूबसूरती तो चाँद को भी खलती है |
उसको जरूरत नही है यूँ कीमती इत्र लगाने की,
उसके बदन की खुशबु तो मुर्दों मई भी जान फुकती है |
उसे जरूरत नही है बालों को बांध कर रखने की ,
उसके बालों से तो तितलियाँ भी खेलती है |
उसे जरूरत नही है यूँ खामोश रहने की ,
उसकी आवाज से तो कोयल भी जलती है |
उसे जरूरत नही है यूँ उदास रहने की ,
उसकी मुस्कुराहट तो हवाओ के रुख बदलती है |
उसको जरूरत नही है यूँ नजरें झुका कर चलने की ,
उसकी नजरे तो हम जैसों के लिए महखाने का काम करती है |
उसे जरूरत नही है अपना ठोड़ी का तिल छुपाने की ,
चाँद की खूबसूरती भी उसके दाग के बिना अधूरी सी लगती है|
उसे जरूरत नही है यूँ धुप से बच निकलने की ,
सूरज में भी तुमको छूने की कभी कभी आह सी पलती है |
उसे जरूरत  नही है बारिश से बच निकलने की ,
ये बारिश की बुँदे भी उसे मिलने के  लिए ही बरसती है |
उसे जरूरत नही है यूँ  मिटटी से बच निकलने की ,
वो मिटटी भी उसे छू कर सोना बनने की कोसिस करती है |
उसे कह दो
उसे जरूरत नही है यूँ आसीष से नफरत करने की ,
उसी के कारण ही तो उसकी शायरियों में एक अलग ही बात झलकती है |

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