मुहब्बत

मुहब्बत करनी है तो रूह से करो के रूह को इश्क हो जाए,
ताकि जब तुम छुओ उसे तो इश्क पाक हो जाए |

मुहब्बत करनी है तो उसके सपनो से कर ,
ताकि जब तुम मिलो उसे तो सपने ताबीर बन जाये |

मुहब्बत करनी है तो उसकी खुशियों से कर ,
ताकि जब वो सोचे तेरे बारे तो उसके गम भी शर्मा जाए|

मुहब्बत करनी है तो उसकी हंसी से कर ,
ताकि जब तुम देखो उसकी ओर तो सारी कायनात उसको

हंसाने में लग जाए |मुहब्बत करनी है तो उसकी मुस्कुराहट से कर ,
ताकि जब तुम देखो उसकी ओर तो वक्त भी थम सा जाए

|
मुहब्बत करनी है तो उसकी सांसों से कर ,
ताकि जब तुम पकड़ो उसका हाथ तो मौत भी उसे छू ना पाए |

मुहब्बत करनी है तो उसके साये से कर ,
ताकि जब वो पूछे तेरे बारे तो उसकी परछाई में उसे तेरा वजूद नजर आये |

मुहब्बत करनी है तो उसके चहरे की चमक से कर ,
ताकि जब वो सुने तेरे बारे तो उसके चहरे पर तेरे नाम का नूर आ जाए।

मुहब्बत करनी है तो उसकी गजाल सी आँखों से कर ,
ताकि जब वो बंद करे आंखे तो बंद आँखों में भी तेरा चेहरा नजर आये|

मुहब्बत करनी है तो उसके लिए अपनी मुहब्बत से कर ,
ताकि जब वो देखे तेरी मुहब्बत तो मुहब्बत करना सिख जाए |

और अगर फिर भी ना माने तो आसीष मुहब्बत कर अपने आप से,
ताकि जब देखे तुझे ये दुनिया तो जीना सिख जाए।।

One thought on “मुहब्बत

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