किसी से मिल कर

**मशवरा**
किसी से मिल कर उसको  रूह से छू देने का हुनर रखो,
अपनों को सुनो गौर से, अपनी बातों को फिर कभी रखो।

दिल पत्थर भी हो, तो क्या गम है ?
कम से कम ज़ुबां में फूलों की दुकां रखो।

अगर देर – सवेर महबूब के सजदे में जाना भी हो,
अपने एक हाथ में गज़ल की किताब जरूर रखो।

और ये मशवरा मुझे सूरज ने चांद की सोहबत में दिया था,
देखो मगर प्यार से, नज़रों में कोई पाप मत रखो।।
***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

अंधेरों में चिराग

अाज अंधरें में चिराग जलाऊं क्या ?
चांद को दावत पर घर बुलवाऊं  क्या ?
सितारें फ्लक पर थक गएं है बहुत,
उनका अपने घर में बिस्तर लगवाऊं क्या ?

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

चांद एक लड़की है

चांद भी एक लड़की है उसको हर वक्त तारीफ़ चाहिए,
जहां बात खूबसूरती की चले,उसे ख़ुद का जिक्र सबसे पहले चाहिए।
मैंने अकेले में उसको भी मायुस देखा है बहुत बार।
यकीन मानो उसको भी आशिक़ की नज़र चाहिए।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

मेरी एक तमन्ना

Ashish Rasila

मेरी एक तमन्ना है, कि मैं फिर से बच्चा बन जाऊं,
मिट्टी में लेट कर माँ से कुछ सिक्के  ले जाऊं।
ख़ुदा मुझे अमीरी का वो लम्हा बख्शे,
के बाप हाथ पकड़े और मैं पूरा शहर खरीद लाऊं।।

*** आशीष रसीला***

सोचता हूं

सोचता हूं दिल के घर में आग लगा कर देखूं,
दिल बगावत करता है, मैं भी बगावत करके देखूं।
वो  मेरी हर बात उसको बता देता है,
आज दिल से कोई  बात दिल की छुपा कर  देखूं।।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila

मौत

मेरी कुछ अधूरी खाईशों को मेरे दिल से ले जा कर कहीं दूर रख दो।
तुम इस मरहम के साथ मेरे प्याले में थोड़ा ज़हर भी रख दो।
आज उसकी बाहों से लिपटकर मुझे सो जाना है,
तुम मेरे आखिरी महबूब का नाम मौत रख दो।

***आशीष रसीला***

Ashish Rasila